इतिहास

वृन्दावन

 

वृन्दावन, मथुरा से 15 किलोमीटर दूर एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। वृन्दावन का नाम आते ही भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का ध्यान आता है। यहीं वनों में उन्होंने गोपियों के संग रास रचाया व राधा को मोहित किया। भगवान के अवतार चैतन्य महाप्रभु ने समय की गर्त में विलुप्त हो चुके वृन्दावन के पवित्र स्थलों की खोज की। चैतन्य महाप्रभु 1515 ई0 में वृन्दावन आये थे। चैतन्य महाप्रभु ने 16वीं शताब्दी के प्रारम्भ में अपने दो प्रिय शिष्यों रूप और सनातन को वृन्दावन में निवास का निर्देश दिया जहाँ बाद में जीवगोस्वामी, रधुनाथ भट्ट व गोपाल भट्ट उनसे आ मिले। वृन्दावन में वैष्णव भक्त दक्षिण से आये। वह यहाँ इतना फले-फूले कि भारत के सभी महान धातु-कर्मी यहाँ आये और कुछ समय निवास किया। यहीं 1968 में भारतीय विशेषतः बृज सभ्यता को समर्पित वृन्दावन शोध संस्थान की स्थापना हुई।

Chetanya

छः गोस्वामियों का कालक्रम

Shadgoswami
  • 1486 श्री चैतन्य प्रकट हुए।
  • 1488 सनातन गोस्वामी प्रकट हुए।
  • 1489 रूपा गोस्वामी प्रकट हुए।
  • 1494 राहुनाथ रघुनाथ गोस्वामी प्रकट हुए।
  • 1503 गोपाल भट्ट गोस्वामी प्रकट हुए प्रकट हुए।
  • 1505 रघुनाथ भट्ट गोस्वामी प्रकट हुए।
  • 1505 प्रभु चैतन्य ने सन्यास लिया।
  • 1513 जीव गोस्वामी प्रकट हुए।
  • 1515 प्रभु चैतन्य का वृन्दावन दर्शन।
  • 1531 रघुनाथ भट्ट गोस्वामी वृन्दावन पधारे।
  • 1534 प्रभु चैतन्य महाप्रभु अदृश्य हुए।
  • 1535 जीव गोस्वामी वृन्दावन पधारे।
  • 1542 राधा दामोदर आराध्य, प्रथम सेवा पूजा।
  • 1542 राधा रमण आराध्य, प्रथम सेवा पूजा।
  • 1545 जीव गोस्वामी ने राधा कुण्ड में भूमि खरीदी।
  • 1552 रूप गोस्वामी ने भक्ति अमृत लिखा।
  • 1558 स्नातन गोस्वामी अदृश्य हुए।
  • 1558 राधा दामोदर में भूमि अर्जन।
  • 1564 रूप गोस्वामी अदृश्य हुए।
  • 1570 वृन्दावन में सम्राट अकबर की जीव गोस्वामी से भेंट।
  • 1571 रघुनाथ दास गोस्वामी अदृश्य हुए।

वृन्दावन में प्रमुख मन्दिर

  • राधा मदन मोहन मन्दिर
  • गोविन्द देव मन्दिर
  • राधा गोपीनाथ मन्दिर
  • राधारमण मन्दिर
  • राधा दामोदर मन्दिर
  • राधा गोकुलानन्द मन्दिर
  • राधा श्याम सुन्दर
  • बांके बिहारी मन्दिर
  • राधा वल्लभ मन्दिर
  • कृष्ण बलराम (इस्कान) मन्दिर